सिर्फ मतलबों के रिश्तेदार बनाये हमने हर बार अपनों ने ही नीचा दिखाया हम को। सिर्फ मतलबों के रिश्तेदार बनाये हमने हर बार अपनों ने ही नीचा दिखाया हम को।
चलो गीत नया कुछ रचते हैं। भ्रमण अंतःकरण का करते हैं।। चलो गीत नया कुछ रचते हैं। भ्रमण अंतःकरण का करते हैं।।
बस तुझे ही चाहा और तेरे ही नाम हुई मैं। बस तुझे ही चाहा और तेरे ही नाम हुई मैं।
हमारे खट्टे-मीठे लम्हों को अपने, सीने से लपेटे रहती है, एल्बम हमारे खट्टे-मीठे लम्हों को अपने, सीने से लपेटे रहती है, एल्बम
ये बात उनको इस कलयुग में समझाना मुश्किल है। ये बात उनको इस कलयुग में समझाना मुश्किल है।
तो लोगों को लगा बूढ़ा सनकी हो गया। तो लोगों को लगा बूढ़ा सनकी हो गया।